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धर्मसंघ का मंगल उद्घोष

धर्म की जय हो। अधर्म का नाश हो॥

प्राणियों में सद्भावना हो। विश्व का कल्याण हो॥

गो हत्या बन्द हो। गौ माता की जय हो॥

॥ हर हर महादेव ॥

धर्मसम्राट १००८ स्वामी हरिहरानन्द सरस्वती करपात्री जी महाराज

तपस्या, शास्त्र, वाङ्मय और धर्मरक्षा के उनके अखण्ड संकल्प की अविच्छिन्न परम्परा—विश्वभर के श्रद्धालुओं के लिए गुरु-परम्परा, धर्म संघ, संस्थानों और सेवा से जुड़ने का उत्तरदायी प्रवेश।

धर्मसम्राट का समग्र जीवन-दर्शन

तपस्या से लोकमंगल तक एक अखण्ड जीवन

त्याग, शास्त्र-अध्ययन, अध्यापन, वाङ्मय और जन-जागरण उनके जीवन के पृथक अध्याय नहीं थे—ये एक ही धर्ममय दृष्टि की परस्पर जुड़ी अभिव्यक्तियाँ थीं।

सम्पूर्ण जीवन-दर्शन
आसन पर विराजमान धर्मसम्राट स्वामी करपात्री जी महाराज
तपस्या और सरलता से प्रकाशित जीवन
एक अन्य संत के साथ पदयात्रा करते धर्मसम्राट स्वामी करपात्री जी महाराज
भारतव्यापी धर्मयात्रा और संत-संवाद
माइक्रोफोन के समीप धर्मसम्राट स्वामी करपात्री जी महाराज
शास्त्र-वाणी, अध्यापन और लोक-जागरण

आचार्य-स्मृति एवं वर्तमान सान्निध्य

एक विराट संकल्प की आध्यात्मिक उपस्थिति

धर्मसम्राट महाराज जी के तप और धर्मसंकल्प से आलोकित यह धारा पूज्य आचार्यों की स्मृति, गुरु-परम्परा, साधना और वर्तमान सेवा में आज भी सतत प्रवाहित है।

  1. दण्ड सहित विराजमान धर्मसम्राट स्वामी करपात्री जी महाराज

    01

    धर्मसम्राट १००८ स्वामी हरिहरानन्द सरस्वती करपात्री जी महाराज

    ब्रह्मलीन

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  2. जगद्गुरु शंकराचार्य पुरी पीठाधीश्वर स्वामी निरंजन देव तीर्थ जी महाराज का चित्र

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    जगद्गुरु शंकराचार्य पुरी पीठाधीश्वर स्वामी निरंजन देव तीर्थ जी महाराज

    ब्रह्मलीन

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  3. 03

    स्वामी सदानन्द सरस्वती वेदान्ती स्वामी

    ब्रह्मलीन

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  4. परम पूज्य स्वामी श्री सर्वेश्वरानन्द सरस्वती जी महाराज का चित्र

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    परम पूज्य स्वामी श्री सर्वेश्वरानन्द सरस्वती जी महाराज

    पीठाधीश्वर, करपात्री धाम · अध्यक्ष, अखिल भारतीय धर्म संघ

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  5. स्वामी श्री धरणानन्द सरस्वती जी महाराज का चित्र

    05

    स्वामी श्री धरणानन्द सरस्वती जी महाराज

    पूज्य आध्यात्मिक उपस्थिति

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अखिल भारतीय धर्म संघ

धर्मसम्राट के संकल्प से आज की वर्तमान सेवा तक

करपात्री धाम किसी एक भवन या चार स्थानों तक सीमित नहीं है। यह गुरु-परम्परा, वेद-संस्कृत शिक्षा, ग्रन्थ-संरक्षण, अनुष्ठान, गौ-सेवा और विश्वभर के श्रद्धालुओं को जोड़ने वाली धर्म-सेवा का समन्वित स्वरूप है।

आचार्य-स्मृति एवं गुरु-धारा

धर्मसम्राट से वर्तमान पीठाधीश्वर तक

यह सार्वजनिक क्रम प्रत्यक्ष गुरु-शिष्य धारा के साथ जगद्गुरु स्वामी निरंजन देव तीर्थ जी महाराज की पावन सेवा-स्मृति को भी उसके सत्य स्थान पर रखता है।

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धर्मसम्राट स्वामी करपात्री जी महाराज

ब्रह्मलीन

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जगद्गुरु शंकराचार्य पुरी पीठाधीश्वर स्वामी निरंजन देव तीर्थ जी महाराज

धर्मसम्राट महाराज जी की जल-समाधि की पावन सेवा

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स्वामी सदानन्द सरस्वती वेदान्ती स्वामी

ब्रह्मलीन

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परम पूज्य स्वामी श्री सर्वेश्वरानन्द सरस्वती जी महाराज

पीठाधीश्वर, करपात्री धाम · अध्यक्ष, अखिल भारतीय धर्म संघ

परम्परा को विस्तार से जानें

चार प्रमुख केन्द्र

संस्थागत उपस्थिति के चार केन्द्र

धर्मसम्राट महाराज जी का प्रभाव इन चार स्थानों तक सीमित नहीं है। काशी, दिल्ली, नेमावर और बीकानेर यहाँ अखिल भारतीय धर्म संघ के चार प्रमुख संस्थागत केन्द्रों के रूप में प्रस्तुत हैं।

सम्पूर्ण केन्द्र-विवरण
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काशी

करपात्री धाम · केदार घाट

02

दिल्ली

धर्म संघ कोठी · सिविल लाइन्स

03

नेमावर

सिद्ध क्षेत्र · मध्य प्रदेश

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बीकानेर

धर्मसंघ संस्कृत विद्यालय · देवकुण्ड सागर